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श्रुत लोकोक्तियाँ - २

जीवन यापन की परिस्थितियाँ (प्रमुखतः स्त्रियां)

बल राज बाप का,

उत्तम भर्तार,

कान-कोन पुत्र का,

निर्मम दामाद || 

 

भावार्थ:

जीवन में जो सबसे सफल और ताकतवर समय वह होता है जब वह अपने पिता की छत्रछाया में होती है (विवाह पूर्व) 

उत्तम समय वह होता है जब वह अपने भर्तार(पति) के साथ होती है

थोड़ा अच्छा व् थोड़ा ख़राब समय वह होता है जब वह अपने पुत्र के साथ रहती है 

और सबसे निर्मम और बुरा समय वह होता है जब उसे अपने दामाद के घर में जीवन यापन करना पड़े ||


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यह कविता हमारे फिल्म जगत के बहुत ही विशुद्ध एवं मंझे हुए कलाकार श्रीमान आशुतोष राणा जी द्वारा एक चैनल के साछात्कार के मध्य में सुनाया गया जो सभी भारतीयों के लिए अत्यंत प्रेरणा श्रोत है एवं वीर रस से ओत प्रोत है हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूँ, सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूँ । सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में आज बता दो कितना पानी, है भारत के वीरो में, खड़ी शत्रु की फौज द्वार पर, आज तुम्हे ललकार रही, सोये सिंह जगो भारत के, माता तुम्हे पुकार रही । रण की भेरी बज रही, उठो मोह निद्रा त्यागो, पहला शीष चढाने वाले, माँ के वीर पुत्र जागो। बलिदानों के वज्रदंड पर, देशभक्त की ध्वजा जगे, और रण के कंकण पहने है, वो राष्ट्रभक्त की भुजा जगे ।। अग्नि पंथ के पंथी जागो, शीष हथेली पर धरकर, जागो रक्त के भक्त लाडले, जागो सिर के सौदागर, खप्पर वाली काली जागे, जागे दुर्गा बर्बंडा, और रक्त बीज का रक्त चाटने, वाली जागे चामुंडा । नर मुंडो की माला वाला, जगे कपाली कैलाशी, रण की चंडी घर घर नाचे, मौत कहे प्यासी प्यासी, रावण का वध स्वयं करूँगा, कहने वाला राम जगे...

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बचपन की कविता १ - उठो लाल

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